दैनिक जीवन में ऊर्जा संरक्षण की संस्कृति का विकास
(Development of a culture of Energy Conservation in Daily Life)
प्रस्तावना – ऊर्जा संरक्षण का अर्थ है कि ऊर्जा का उपयोग कम करने की प्रणालियों को अपनाते हुए ऊर्जा के उपभोग को कम करना है। आज की दुनिया में हम जो भी काम करते हैं सबके लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है, चाहे वह कार्य स्थान पर हो, चाहे घर में हो या कार में हो या कोई मनोरंजन का स्थान हो। उदाहरण के लिए, हम फैन, बल्ब, ए०सी० कुछ भी ऑन किए बिना अपने कार्यस्थल पर काम नहीं कर सकते। जब हम टीवी देखते हैं, कपड़े धोते हैं,नहाते हैं, खाना बनाते हैं, मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं , कंप्यूटर का प्रयोग करते हैं आदि कार्यों में हम ऊर्जा का प्रयोग करते हैं। वास्तविकता यह है कि जिस तेजी से हम इन संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं उसे देखते हुए, वह दिन दूर नहीं जब धरती से ऊर्जा के हमारे यह संसाधन विलुप्त हो जाएंगे। इन्हीं संसाधनों को बचाने के लिए हमें ऊर्जा संरक्षण करना जरूरी है, साथ ही साथ लोगों को जागरूक करने के लिए हमें यह प्रचार प्रसार करना चाहिए –
भारत सरकार द्वारा हमारे देश के लोगों के बीच ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान एसोसिएशन वर्ष 1977 में स्थापित किया गया। हर साल 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस एक विशेष विषय के साथ कुछ लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखकर मनाया जाता है।
उपाय : हमारा देश बिजली उत्पन्न करने व उसकी खपत करने में विश्व में पांचवें स्थान पर है। हमारे देश में बिजली का उत्पादन हर साल बढ़ रहा है, साथ ही साथ जनसंख्या भी बढ़ रही है। बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा और ऊर्जा संरक्षण ही एकमात्र उपाय है, जिससे हम ऊर्जा की मांग और पूर्ति के बीच सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं। ऊर्जा संरक्षण आज की जरूरत है तभी हमारा कल सुनहरा होगा। कुछ सावधानियां बरतकर, अपने संसाधनों का विवेकशील प्रयोग करके हम आसानी से बड़ी मात्रा में ऊर्जा का संरक्षण कर सकते हैं। दैनिक जीवन में ऊर्जा संरक्षण की संस्कृति के विकास के लिए हमें निम्नलिखित ऊर्जा संरक्षण के उपाय करने पड़ेंगे :-
उपाय को आदत बनायें
१. जब आवश्यकता न हो तो पंखा, लाइट, रेफ्रिजरेटर, टीवी, को बंद करके रखें।
२. ऊर्जा बचाने वाले एलईडी बल्ब व ट्यूबलाइट का प्रयोग करें।
३. वैकल्पिक ऊर्जा का जैसे सौर ऊर्जा प्रयोग करें।
४. खाना बनाने से पहले सभी पदार्थ तैयार करें।
५. गैस को प्रयोग के बाद तुरंत बंद कर दें।
६. खाना बनाने में प्रेशर कुकर का प्रयोग करें।
७. खाना बनाते समय बर्तन को पास में रखें।
८. गर्मियों में सुबह सवेरे ही पर्दे, दरवाजे बंद कर दें, जिससे घर ठंडा रहे।
९. चावल, दाल इत्यादि को पकाने से पहले पानी में भिगोकर रखें।
१०. घरों की दीवारों और छतों को हल्के रंग से रंगे, ताकि कम लाइट का ज्यादा प्रतिबिंब पड़े।
११. साइकिल खरीदें और हो सके तो सप्ताह में 3 दिन साइकिल से काम पर जाएं।
१२. काम पर जाने के लिए विशेषकर शहरों में सार्वजनिक वाहन का प्रयोग करने की कोशिश करें।
१३. जहां तक हो सके, पैदल चले।
१४. जहां तक हो सके पूरा परिवार साथ में खाना खाए जिससे खाने को बार-बार गर्म करने से बचा जा सके।
१५. गर्म खाने को फ्रिज में कभी न रखें ।
१६. कोई भी उपकरण इस्तेमाल के बाद उसका स्विच ऑफ कर दें।
१७. दिन में खिड़की को खोलकर रखें तथा थर्मल पर्दे लगाएं या परदों को हटाकर रखें।
१८. ऊर्जा संचालित उपकरणों की सर्विस कराना भी बहुत आवश्यक है।
१९. हमें अपने घरों में जल संरक्षण भी करना होगा, जिससे ऊर्जा का संरक्षण हो सके।
२०. घर के बाहर आवश्यकता होने पर ही लाइट ऑन करें।
२१. टीवी, म्यूजिक सिस्टम और टेप रिकॉर्डर को स्टैंडबाय मोड में कभी न रखें। स्टेंड-बाई मोड में रखने पर साल में 60 यूनिट बिजली खर्च होती है।
२२. पांच स्टार लेवल वाले अथवा आई एस आई मार्क वाले बिजली के उपकरणों का ही प्रयोग करें, जिससे ऊर्जा संरक्षण हो सके।
२३. गीजर को पानी गरम करने के लिए आवश्यकता के अनुसार चलायें, पूरे टाइम ऑन नहीं रखें।
२४. ऑफिस और घर में एयर कंडीशनर का विवेकपूर्ण उपयोग करें।
हमें अपने बच्चों में ऊर्जा संरक्षण के बताए गए उपायों को एक संस्कृति के रूप में विकसित करना होगा यानी हमें हर वक्त बच्चों को ऊर्जा संरक्षण के सभी उपायों को रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग कराकर एक संस्कृति का विकास करना होगा। मुख्य बात यह है कि ऊर्जा संरक्षण को यदि हम आदत बना लेंगे तो पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सकेगा। इस तरह हमारा पर्यावरण भी कम प्रदूषित होगा और हमारी जिंदगी भी उच्च स्तरीय हो जाएगी।
आइए हम सब मिलकर संकल्प करें –
“ऊर्जा बचाने का करो संकल्प, पृथ्वी को बचाने का है यही एकमात्र विकल्प।”
उपसंहार- यह आवश्यक है कि हम ऊर्जा संरक्षण की ओर विशेष ध्यान दें और अपने दैनिक जीवन में ऊर्जा संरक्षण की आदत को अपनाकर और बच्चों में भी इस आदत का विकास करके हम ऊर्जा संरक्षण की संस्कृति का विकास कर सकते हैं।
ऊर्जा की खपत करो कम,
सौर ऊर्जा को आज ही अपनाओ ।
प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्त्तव्य निभाओ,
घर में एलईडी बल्ब लगाओ।








