सिंगल -यूज़ प्लास्टिक से पर्यावरण की सुरक्षा (Save Environment from plastic)
प्रस्तावना (Introduction) – पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बहुत से कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें प्लास्टिक एक बहुत बड़ा खतरा बनकर उभरा है। दिन की शुरुआत से लेकर रात में बस्तर पर जाने तक अगर ध्यान से गौर किया जाए, तो आप पाएंगे कि प्लास्टिक ने किसी न किसी रूप में आपके हर पल पर कब्जा कर रखा है। टूथब्रश से लेकर ऑफिस में खाने के टिफिन, प्लास्टिक की बोतल, बाजार से कोई सामान लाना आदि यानि प्लास्टिक हर जगह है, हर समय है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कोका-कोला, पेप्सी समेत कई दर्जन कंपनियां से पैकेजिंग की वैकल्पिक सामग्री का सुझाव देने का निर्देश दिया था। भारत में 2 अक्टूबर 2019 से सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में 1 जुलाई 2022 से सिंगल -यूज़ प्लास्टिक (एक बार प्रयोग होने वाली प्लास्टिक) के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण बिगड़ता पर्यावरण दुनिया के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता है। ऐसे में प्लास्टिक से पैदा होने वाले प्रदूषण को रोकना पूरे विश्व का कर्तव्य है। इसके लिए सबसे पहले हमें सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और उसके उपयोग को समाप्त करना होगा। जो सिंगल यूज़ प्लास्टिक मिट्टी में दफन हो जाता है, और वे जो पानी की सहायता से समुद्र में पहुंचता है और वहां के जीवों को नुकसान पहुंचता है। ये प्लास्टिक टूटकर जहरीले रसायन भी छोड़ते हैं, जो मानव शरीर में पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचाते हैं।
“प्लास्टिक को अपने जीवन से हटाएं,
पर्यावरण और धरती को स्वच्छ बनाएं।”
सिंगल यूज़ प्लास्टिक एक ऐसा प्लास्टिक है, जिसका उपयोग हम केवल एक बार करते हैं। एक बार उपयोग करके कूड़ेदान में फेंक दी जाने वाली प्लास्टिक ही सिंगल यूज़ प्लास्टिक कहलाती है। हम लोग इसे डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक भी कहते हैं, जैसे -प्लास्टिक बैग, प्लास्टिक बोतले, स्ट्रॉ, कप, प्लेट्स, फूड पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, गिफ्ट रैपर्स और कॉपी की डिस्पोज़ेबल कवर आदि।
“प्लास्टिक प्रदूषण को जड़ से उखाड़ना है,
कपड़े और जूट बैग को अपनाना है।”
यहां हम सिंगल यूज़ प्लास्टिक से होने वाले निम्नलिखित नुकसानों का वर्णन करेंगे:-
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से पर्यावरण का नुकसान :- पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में प्लास्टिक एक बहुत बड़ा खतरा है। जैसा कि मैंने ऊपर बताया है कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक मिट्टी में दफ़न करने पर मिट्टी में घुल मिल नहीं पाते और सीधे पानी व हवा के माध्यम से समुद्र में पहुंचते हैं और कुछ लोगों की वजह से ये प्लास्टिक नदियों, तालाबों, झरनों, और समुद्र में सीधे तौर पर फेंक दी जाती है, जिससे समुद्र की जीवों के साथ साथ मैदानों में रहने वाले जीव जैसे गाय, कुत्ता आदि दिन पर दिन समाप्त हो रहे हैं। हमारी गायें जिनसे हमें दूध मिलता है, वे प्लास्टिक खाकर मर जाती है। इतना ही नहीं इन प्लास्टिक से बहुत ही जहरीले रसायन पदार्थ पैदा होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। दुनिया भर में लगभग 70000 टन प्लास्टिक महासागरों और समुद्र में फेक दिए जाते हैं और बहुत से समुद्री जीव और मछलियां, कछुए आदि उसे भोजन समझ कर खा जाते हैं। जिससे उनके शरीर के अंदर प्लास्टिक चली जाती है और इससे श्वास मार्ग में अवरोध होता है और वो मर जाते हैं। प्लास्टिक बैग्स बहुत से जहरीले केमिकल्स से मिलकर बनते हैं जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण को बहुत हानि पहुंचती है। इन्हें बनाने में जायलेन, इथिलीन ऑक्साइड और बेंज़ीन जैसे केमिकल्स प्रयोग में लाए जाते हैं। इन केमिकल्स से बहुत सी बीमारियाँ और विभिन्न प्रकार के डिसऑर्डर्स हो जाते हैं। प्लास्टिक को जलाने और फेंकने पर जहरीले रसायन का उत्सर्जन होता है, जो सांस लेने पर शरीर में प्रवेश कर श्वसन प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इस प्रकार प्लास्टिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।
“प्लास्टिक है जहर,मानव जीवन के लिए कहर।”
प्लास्टिक का उपयोग बढ़ने का कारण:- प्लास्टिक महंगा नहीं है और उसे एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना आसान पड़ता है। प्लास्टिक की बोतलों में पानी पहुंचाना, फूड पैकेजिंग में प्रयोग होने वाले प्लास्टिक के माध्यम से खाना पहुंचना आसान तरीका है, साथ ही साथ सस्ता होने के कारण लोगों को फायदा ज्यादा होता है। सिंगल यूज़ प्लास्टिक ने आज हर घर में अपनी जगह बना ली है, क्योंकि कम बजट में लोग बड़े-बड़े कार्यक्रम को आसानी से सफल बना देते हैं। प्लास्टिक के टूटने-फूटने का खतरा नहीं होता है, इसलिए लोग इसका प्रयोग करना पसंद करते हैं। लेकिन हम अपनी सहूलियत के कारण उससे होने वाले नुकसान को नज़रअंदाज कर रहे हैं। आज ₹2 का सामान बेचने के लिए हम प्लास्टिक का सहारा ले रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसको बैन करके ही हम इस समस्या से निजात पा सकते हैं और कोई दूसरा उपाय नहीं है। हमारी भी आदत खराब हो गई है पहले हम खरीदारी करने जाते समय कपड़े के बैग जरूर ले जाते थे, लेकिन आज यह हमारी आदत का हिस्सा नहीं रहा। बस हम यहां यह कह सकते हैं कि सस्ता और आसानी से कैरी किए जाने के कारण प्लास्टिक का उपयोग दिन पर दिन बढ़ गया है।
“पाली बैग नहीं तुम्हारा दोस्त, गंदगी और बीमारी का है मुख्य स्त्रोत।”
उपाय:- प्लास्टिक बैग से होने वाले पर्यावरण के नुकसान को कम करने की दिशा में हर एक इंसान कुछ बेहद जरूरी कदम उठा सकता है। सतर्कता और जागरूकता दो बेहद जरूरी चीजें हैं। जिन्हें प्लास्टिक के खिलाफ अपनाया जा सकता है।
1. प्लास्टिक के बैग्स को संभालकर रखें, इन्हें कई बार इस्तेमाल में लाएं। बाजार सामान खरीदने जाने के समय अपने साथ कपड़े या जूट से बने बैग लेकर जाएं।
“आओ अपनी पुरानी आदत विकसित करें,
प्लास्टिक की जगह जूट, कपड़े के बैग्स का प्रयोग करें।”
2. ऐसे प्लास्टिक के इस्तेमाल को बंद कर दें, जिन्हें एक बार इस्तेमाल के बाद ही फेंकना पड़ता है जैसे प्लास्टिक के पतले गिलास, तरल पदार्थ पीने की स्ट्रास, कप्स, कटोरी, प्लेट्स आदि अन्य सामान।
3. आज हर घर में छोटे-मोटे कार्यक्रम में भी सिंगल यूज़ प्लास्टिक जैसे प्लेट्स, गिलास, स्टॉ, कटोरी आदि का उपयोग बहुत ज्यादा किया जाने लगा है, क्योंकि यह आसानी से मिल जाते हैं और सस्ते होते हैं। लेकिन जब इसका उत्पादन करने वाली कंपनियां ही बंद हो जाएगी और मिट्टी के गिलास, कुल्लड़ आसानी से मिलेंगे, तो सिंगल यूज़ प्लास्टिक खत्म हो जाएगा। लेकिन यह इतना आसान नहीं है; इसे हम सबको मिलकर अपनी आदतों को बदलकर ही करना होगा।
“क्या आपको यह एहसास है कि प्लास्टिक प्रदूषण अभिशाप है?”
4. यदि हर घर की रसोई में प्लास्टिक के बर्तनों, सामानों को कम करके उनका उपयोग धीरे-धीरे बंद कर दे और उन्हें ज्यादा से ज्यादा रिसाइकिल करें और ऐसे स्थान पर पहुंचाएं, जहां रिसाइकिल किया जाता हो। इसके साथ हम उन प्लास्टिक का ही उपयोग करें जो पी०ई०टी०ई० और एच०डी०पी०ई० प्रकार के हों, क्योंकि इनको आसानी से रिसाइकिल किया जा सकता है। हमें घरों में प्लास्टिक की जगह दूसरे पदार्थ से बने सामानों का ज्यादा इस्तेमाल करना होगा तभी हम प्लास्टिक से निजाद पा सकते हैं।
“स्वच्छ राष्ट्र बनाना है,हर घर से प्लास्टिक को हटाना है।”
5. खुद प्लास्टिक को खत्म करने की कोशिश न करें, न ही पानी में डालें, न ही जमीन पर इधर-उधर फेंके, न ही जमीन के नीचे प्लास्टिक दबाएं, क्योंकि प्लास्टिक खत्म होता नहीं है। इसे जलाना भी पर्यावरण के लिए अत्यधिक हानिकारक है। प्लास्टिक को केवल रिसाइकिल किया जा सकता है।
उपसंहार (Conclusion): – प्लास्टिक बैग से होने वाले नुकसान की जानकारी अपने आप में नाकाफी है, जब तक इसके नुकसान जानने के बाद ठोस कदम न उठाया जाएं। सरकार और पर्यावरण संस्थाओं के अलावा भी हर एक नागरिक की पर्यावरण के प्रति कुछ खास जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें अगर समझ लिया जाए तो पर्यावरण को होने वाली हानि को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। खुद पर नियंत्रण इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है।सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का कम उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी दैनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करे, तो प्रदूषण को कम किया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।








